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स्त्री का दर्द , नारी poem on female ,stri

स्त्री का दर्द , नारी poem on female ,stri

 स्त्री

नारी


दुनिया की उलझनों को जो सुलझा के बैठी है वो एक मां एक बेटी एक नारी है
रिश्तों को बचाने के लिए अपमान के खुट भी पी जाती हैं वो एक मां एक बेटी एक नारी है
जिस घर में बचपन से पली बड़ी हुई उस घर को छोड़ कर चली जाती हैं वो एक मां एक बेटी एक नारी है
गलत के सामने झुकती नहीं हैं जो पत्थर बन खड़ी हो जाती हैं वो एक मां एक बेटी एक नारी है
मोम जैसे दिल को भी पत्थर बना देती है वो मां एक बेटी एक नारी है
सम्मान करो दोस्तो उसका क्यों की वह केवल स्त्री नहीं एक मां एक बेटी एक नारी है


स्त्री का सामान होगा तभी इस देश का कल्याण होगा 
Salute for women 



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